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Chyawanprash Benefits in Hindi

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    च्यवनप्राश क्या है?

    च्यवनप्राश एक आयुर्वेदिक पौष्टिक रसायन है जो शरीर को गहराई से पोषण देता है और रोगों से लड़ने की क्षमता देता  है यह 30-40 से अधिक जड़ी-बूटियों से बनाया जाता है इसका स्वाद मीठा, हल्का मसालेदार खट्टा होता है |

    च्यवनप्राश क्या है?

    च्यवनप्राश का इतिहास

     च्यवनप्राश का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है इसका उल्लेख कई आयुर्वेदिक ग्रंथो से मिलता है इनका नाम ऋषि च्यवन के नाम पर रखा गया है क्योंकि ऋषि च्यवन वृद्ध और कमजोर थे उनकी उम्र  अधिक थी और शरीर में शक्ति कम थी तब देव वैद्य ने उनके लिए एक  औषधीय  तैयार किया जिससे- उनकी ताकत वापस आ गई  , शरीर और बल में सुधार हुआ इसलिए इस  औषधीय  को  च्यवन-प्राश  कहा गया |

    आयुर्वेद में च्यवनप्राश भूमिका

    आयुर्वेद में इसकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है । आयुर्वेद के अनुसार च्यवनप्राश शरीर के सप्त धातुओं -को पोषण देता है। यह त्रिदोष को सतुलित करके बार बार होने वाले सर्दी-जुकाम, एलर्जी को भी रोकता है आयुर्वेद के अनुसार यह छात्रों, बुजुर्गों और मानसिक तनाव वाले लोगों के लोगो के लिए भी उपयोगी है यह शरीर को प्राकृतिक ऊर्जा देने के साथ साथ बालों व त्वचा के लिए भी फायदेमंद होता है |

    च्यवनप्राश के प्रमुख Benefits

    1. प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाता है – च्यवनप्राश शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता हैं और शरीर मे होने वाले संक्रमण एलर्जी ,सर्दी-जुखाम से बचाता है |

    2. पाचन शक्ति में सुधार – च्यवनप्राश  पेट दर्द ,गैस,अपच जैसे problems मे सुधार करता है और भोजन को सही तरीके से पचाने मे मदद करता है |

    3.  शक्ति व स्टैमिना बढ़ाता है – यह सप्त धातुओं को पोषण देकर मांसपेसियों और नशो को ताकत  देता है |

    4. मानसिक शक्ति और स्मरण शक्ति को बढ़ाता है – च्यवनप्राश  तनाव और मानसिक थकान को घटाता है यह मस्तिष्क को पोषण देने के साथ साथ स्मरणशक्ति को मजबूत करता है |

    5. त्वचा और बालों को पोषण देना – च्यवनप्राश में आवला जैसे  मुख्य घटक शामिल है जो  त्वचा को ग्लो   और बालो का झड़ना  कम करता है|

    6. एंटी-एजिंग गुण –  च्यवनप्राश में आवला ,घी जैसे मुख्य घटक होते है जो कोशिकाओं को ऊर्जा देते है |

    च्यवनप्राश में मिलाई जाने वाली मुख्य सामग्री

    च्यवनप्राश में लगभग 30–40 से अधिक जड़ी- बूटियों से बनाया जाता है निचे कुछ मुख्य घटक दिए गए है

    1. आंवला – च्यवनप्राश का सबसे मुख्य घटक आंवला है, आंवला विटामिन-C का प्राकृतिक स्रोत है|

    2. दशमूल – 10 जड़ों का समूह जैसे – अग्निमंथ, शोनक, पाटला, गम्भारी, शालपर्णी, प्रिश्निपर्णी, बृहती, आदि यह शरीर में त्रिदोषो को संतुलित करता है |

    3. घी – इसमे गाय का घी डाला जाता है जो शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है और मस्तिष्क और नशो को ताकत देता है |

    4. शहद – ठंडा होने पर शुद्ध मधु मिलाया जाता है गर्म मिश्रण में कभी भी  शहद नहीं मिलाया जाता है| यह स्वाद को और प्रभावशील बनता है |

    5. तिल का तेल – तिल का तेल  वात-दोष को शांत करता है |

    6. हर्बल चूर्ण –  त्रिफला ,त्रिकटु, नागकेसर चूर्ण,दालचीनी, इलायची  आदि चूर्ण  शामिल है जो पाचन को सपोर्ट देते है |

    7. अश्वगंधा – यह शरीर में शक्ति और स्टैमिना को बढ़ाती है |

     च्यवनप्राश कब और कैसे खाएँ?

    चवनप्राश को सही समय लेने और सही तरीके से खाने से इसके लाभ कई गुना बढ़ जाते है | नीचे आपको चवनप्राश कब और कैसे  और कितनी मात्रा मे लेना चाहिए सब विस्तार से बताया गया है |

    च्यवनप्राश लेने का सही समय

    (1) सुबह खाली पेटसुबह उठ कर 1-2 चम्मच च्यवनप्राश लेना सबसे अच्छा समय माना गया है क्योंकि इससे पाचन और ऊर्जा पर तेज असर पड़ता है |

     (2) रात को सोने से पहले – यदि किसी को खासी ,जुखाम या कमजोरी हो तो उनको सोने से पहले च्यवनप्राश लेना फायदेमंद होता है ,और यह अच्छी नीद लेने मे भी मदद करता है|

    (3) भोजन के 30 मिनट बाद – भोजन करने के तुरंत बाद गैस, एसिडिटी पेट मे जलन होती है उनको च्यवनप्राश भोजन के बाद लेना ज्यादा अच्छा   माना गया है यह पाचन अग्नि को संतुलित करता है

    च्यवनप्राश लेने का सही तरीका

    1) च्यवनप्राश  की 1-2 चम्मच आप सीधे बिना किसी के साथ भी ले साथ सकते है यह इम्यूननिटी को बढाने मे मदत करती है |

    (2) गर्म दूध के साथच्यवनप्राश को गुनगुने दूध के साथ लेना यह सबसे लोकप्रिय तरीका है 1 गिलास गुनगुने दूध में   1–2 चम्मच च्यवनप्राश  को अच्छे से मिलाकर पीने से कमजोरी दूर होती है और नीद में  सुधार होता है |

    गुनगुने पानी के साथ- जिनको दूध नहीं पचता है वो हल्के गर्म पानी के साथ भी ले सकते है यह पाचन के लिए अच्छा है।

    च्यवनप्राश लेने की सही मात्रा

    5 वर्ष से ऊपर के बच्चों के  लिए ½ से 1 चम्मच   को दूध के साथ देना  अच्छा रहता है |

     बड़ों के लिए 1–2 चम्मच सुबह को लेना अच्छा रहता है अगर आवश्यकता पड़े तो रात को भी 1 चमचा ले सकते है |

    च्यवनप्राश  सर्दियों के मौसम मे लेना सबसे अच्छा माना जात है यह शरीर में पाचन शक्ति को मजबूत करता है |

    च्यवनप्राश किन लोगों को नहीं लेना चाहिए

    1. डायबिटीज – जिन लोगों का ब्लड शुगर बहुत ज़्यादा रहता है उन्हें च्यवनप्राश नहीं लेना चाहिए। इसमे चीनी\ शहद \गुड़ होता है |

    2. पित्त प्रकृति वालों को – च्यवनप्राश  की तासीर गर्म होती है  जिससे पित्त बढ़ता है और गैस एसिडिटी ,जलन जैसे समश्याए बढ़ सकती है इसलिए पित्त प्रकृति वालो को च्यवनप्राश नहीं लेना  चाहिए |

    3. किसी सामग्री से एलर्जी हो – जिन लोगो को किसी जड़ी -बूटी जैसे आंवला ,घी,दालचीनी पिप्पली, शहद से किसी प्रकार की एलर्जी हो तो उनको नहीं लेना चाहिए |

    च्यवनप्राश को लाइफस्टाइल के साथ कैसे शामिल करें?

    (1) सुबह की हेल्दी रूटीन  में 1–2 चम्मच च्यवनप्राश लें इससे दिनभर शरीर में एनर्जी रहती है,और इम्यूनिटी मजबूत रहती है |

    (2) जिम या योगा करने से पहले 1-2 चम्मच च्यवनप्राश लें जिसे stamina और strength बढ़ता है और थकन कम लगती  है |

    (3) जिन्हें नींद नहीं आती है तनाव रहता है वह रात को 1 चम्मच च्यवनप्राश  गर्म दूध के साथ ले इससे नीद  अच्छी आएगी |

    निष्कर्ष:   सम्पूर्ण जानकरी जानने के बाद निष्कर्ष ये निकलता है की च्यवनप्राश एक आयुर्वेदिक रसायन है जो शारीर को उर्जा देता है इम्यूनिटी को बूस्ट करता है लाइफस्टाइल में इसे सही समय और सही मात्रा मे लेने से शरीर स्वस्थय रहता है| सर्दियों के मौसम में ये सबसे ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है यह शरीर को  हर मौसम में रोगों से सुरक्षा प्रदान करता है |

     

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