पुरुषों में यौन समस्याएँ (sex problems in men in hindi)
जैसा कि नाम से ही पता चलता है, यह हमारी पीढ़ी की सच्चाई है। शोध बताते हैं कि 80 और 90 के दशक से पुरुषों की यौन समस्याएँ (men sex problems) बढ़ी हैं।और फिर भी आधुनिक विज्ञान (Modern Science) के युग में इसका कोई इलाज नहीं है।
इसके कई कारण हैं:
- जीवनशैली संबंधी समस्याएँ (Lifestyle-related problems)
- तनाव और मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ (Stress and mental health problems)
- मिलावटी भोजन का सेवन
- यौन शिक्षा का अभाव
- चयापचय या हार्मोनल समस्याएँ (hormonal problems) आदि।

लेकिन हम भाग्यशाली हैं कि आयुर्वेद (Ayurveda) हमारे साथ है।
पुरष्वेद में हम पुरुषों के स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं, यौन समस्याओं और मानसिक समस्याओं का इलाज अपने 5000 साल पुराने विज्ञान के ज़रिए करते हैं, जिसमें पौधों और खनिजों पर आधारित औषधियाँ शामिल हैं – आयुर्वेद, जो अथर्ववेद का एक अंग है।
आयुर्वेद के आठ अंग हैं और उनमें से एक है वाजीकरण। आयुर्वेद में वाजीकरण शब्द का अर्थ है, घोड़े जैसा बलवान और पौरुषवान, अर्थात कामोत्तेजक। लेकिन वाजीकरण औषधियों के सेवन के कुछ नियम हैं और उनमें से एक है रसायन द्रव्य, यानी कायाकल्प करने वाली जड़ी-बूटियाँ और खनिज। रसायन द्रव्य धातु पोषण की शुरुआत करते हैं, यानी हमारे शरीर के मुख्य ऊतकों को पोषण देने और उनका संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं, जिससे वाजीकरण द्रव्य उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं और शरीर की कोशिकाओं को बेहतर बनाते हैं।
आजकल पुरुषों को कई यौन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे:
- कम कामेच्छा (Low libido)
- कम टेस्टोस्टेरोन, शुक्राणु की गुणवत्ता या मात्रा की समस्याएँ। (Low testosterone, problems with sperm quality or quantity)
- स्तंभन दोष (Erectile dysfunction)
- शीघ्रपतन, आदि। (Premature ejaculation)
हमारे आयुर्वेदाचार्यों ने इन सभी समस्याओं का समाधान बताया है। आइए इन स्वास्थ्य समस्याओं और उनके प्रबंधन के तरीकों के बारे में जानें।
- कम कामेच्छा(Low Libido): इसमें व्यक्ति सामान्य से अधिक उत्तेजना या सेक्स में रुचि महसूस नहीं करता है।आयुर्वेद में कम कामेच्छा वात पित्त और कफ दोषों में असंतुलन और प्रमुख ऊतकों में से एक, यानी शुक्र धातु की कमी का संकेत है।इस वाजीकरण में द्रव्य का उपयोग तीनों दोषों और शुक्र धातु नामक प्रमुख ऊतक के संतुलन को बनाए रखने के लिए किया जाता है।इस वाजीकरण में द्रव्य का उपयोग तीनों दोषों और शुक्र धातु नामक प्रमुख ऊतक के संतुलन को बनाए रखने के लिए किया जाता है।

शरीर विज्ञान के अनुसार, कम कामेच्छा पुरुष हार्मोन के निम्न स्तर या शुक्राणुओं के खराब स्वास्थ्य के कारण होती है।
2. इरेक्टाइल डिस्फंक्शन (Erectile dysfunction): यह पुरुष की उत्तेजना बनाए रखने या संभोग के दौरान उत्तेजना होने में असमर्थता है।स्तंभन दोष: यह पुरुष की उत्तेजना बनाए रखने या संभोग के दौरान उत्तेजना होने में असमर्थता है।आयुर्वेद में, यह वात दोष में असंतुलन और शुक्र धातु की कमजोरी है, जिसके कारण उत्तेजना होने या उसे बनाए रखने में असमर्थता होती है, यह शारीरिक, भावनात्मक या हार्मोनल कारकों के कारण हो सकता है।

3. शीघ्रपतन (Premature ejaculation): इसमें पुरुष संभोग के दौरान उस समय से पहले ही स्खलित हो जाता है, जब उसे इसकी आदत होती है या होनी चाहिए।यह वात के असंतुलन और शुक्र धातु की दुर्बलता के कारण होता है। वाजीकरण चिकित्सा के प्रयोग से रोगी की सहनशक्ति, नियंत्रण और आत्मविश्वास में सुधार होता है।

वाजीकरण उपचारों में उपयोग की जाने वाली कुछ जड़ी-बूटियाँ और खनिज हैं:
- सफेद मूसली
- कपिकच्चु
- अश्वगंधा
- Shilajit
- गोक्षुर
- स्वर्ण भस्म
पुरष्वेदा का दृष्टिकोण (PurshVeda’s Approach):
PurshVeda में हमारा उद्देश्य सिर्फ लक्षणों का नहीं, बल्कि समस्या की जड़ का उपचार करना है।
हम आधुनिक जाँच पद्धतियों को पारंपरिक आयुर्वेदिक वाजीकरण चिकित्सा से जोड़कर एक समग्र (Holistic) उपचार प्रदान करते हैं।
हर व्यक्ति के शरीर और मन का संतुलन अलग होता है, इसलिए प्रत्येक उपचार व्यक्तिगत (Personalized) और गोपनीय (Confidential) होता है।


